प्रतिरोधी नैदानिक किट प्रयोगशाला [इम्यूनोडायग्नोस्टिक किट प्रयोगशाला ]



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भारतीय जन मानस की सुरक्षा एवं बचाव के लिए आईडीकेएल वर्ष 1995 में संचालित होना शुरू हुआ। तब से, यह स्वदेशी रूप से निर्मित तथा आयातित सीरोलॉजी किटों जैसे रैपिड (RAPID), एलिसा (ELISA), पुष्टिकारी (Confirmatory), क्लिया (CLIA) और एल्फा (ELFA) की गुणवत्ता जाँच करता आ रहा है, जो मानव रक्त एवं / या उसके घटकों में मानव इम्यूनोडेफिशिएंसी वायरस (HIV), हेपेटाइटिस बी वायरस (HBV), हेपेटाइटिस सी वायरस (HCV) तथा सिफिलिस के निदान हेतु प्रयुक्त होती हैं। इन किटों की आपूर्ति एनआईबी को केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) तथा उसके कार्यालयों, नाको के उपार्जनकर्ता प्रभाग और विभिन्न सरकारी एजेंसियों द्वारा की जाती है। भारत सरकार ने 27 अगस्त, 2002 को राजपत्र संख्या (Gazette No.) GFR 601(E) के माध्यम से इस प्रयोगशाला को HIV, HCV और HBsAg की नैदानिक किट की जांच हेतु केंद्रीय औषधि प्रयोगशाला (CDL) के रूप में अधिसूचित किया था। इसके बाद, 22 दिसंबर, 2014 को राजपत्र संख्या GFR 908(E) के माध्यम से पुनः केंद्रीय औषधि प्रयोगशाला (CDL) के रूप में अधिसूचित किया गया। तत्पश्चात, मानव इम्यूनोडेफिशिएंसी वायरस (HIV), हेपेटाइटिस बी सतह एंटीजन (HBsAg) तथा हेपेटाइटिस सी वायरस (HCV) के लिए इन-विट्रो डायग्नोस्टिक्स प्रयोगशाला को भारत सरकार द्वारा दिनांक 01 जून, 2018 को राजपत्र संख्या राजपत्र संख्या S.O. 2237(E) के माध्यम से केंद्रीय चिकित्सा उपकरण परीक्षण प्रयोगशाला (CMDTL) के रूप में अधिसूचित किया गया।


प्रयोगशाला वर्ष 1999 से प्रतिरोधी (serology) के लिए अंतरराष्ट्रीय पीटी / ईक्यूएएस (EQAS) में नियमित रूप से भाग ले रही है। वर्ष 2000 में प्रतिरोधी नैदानिक किट प्रयोगशाला को राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण संगठन (NACO), भारत, द्वारा राष्ट्रीय संदर्भ प्रयोगशाला (NRL) के रूप में नामित किया गया है, तथा यह एचआईवी परीक्षण को सुदृढ़ करने के लिए उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड राज्यों की निगरानी कर रही है। प्रयोगशाला घरेलू निर्माताओं को उनकी स्वदेशी रूप से निर्मित किटों की गुणवत्ता सुदृढ़ करने के लिए नियमित रूप से प्लाज़्मा के नमूने (Plasma Samples) उपलब्ध कराती है। प्रयोगशाला में एक गुणवत्ता प्रबंधन प्रणाली स्थापित है और यह HIV-Ab, HCV-Ab, HBsAg तथा syphilis serology (सिफिलिस प्रतिरोधी) के लिए परीक्षण के लिए राष्ट्रीय प्रत्यायन बोर्ड (NABL) द्वारा मानक ISO/IEC 17025:2017 के अनुसार मान्यता प्राप्त है।


एनआईबी के एक अन्य आदेश के अनुसार, यह प्रयोगशाला स्वास्थ्य सेवा पेशेवरों, शिक्षाविदों, नियामकों, स्नातक छात्रों और/या विभिन्न विश्वविद्यालयों/संस्थानों आदि के स्नातकोत्तर छात्रों को नियमित रूप से प्रायोगिक प्रशिक्षण भी प्रदान कर रही है।